इसपर पंडित जी का नापा तुला जवाब था, "जी जजमान, आपके पैसे भी वसूल करवाने थे और फिर थोड़ी सी तंगी भी थी....इसलिए.....
कुछ मिल जाए तो हम भी मना लेंगे."
"ठीक है ठीक है. पहले ये बताइए शादी की आपने त्रिशाला के साथ. आप तो उसके नाम का भी मतलब बताने वाले थे..."
"हाँ-हाँ जजमान. शादी भी हो गयी और मतलब भी ठीक से पता चल गया. अब अगर एक अच्छे से ब्रांड की दारू अंदर चली जाए तो मतलब भी
बाहर आ जाए."
क्या करें. दारू बाहर निकालनी ही पड़ी. खुद को चाहे इसकी बदबू भी पसंद ना हो, पंडित-मौलवियों के लिए तो रखनी ही पड़ती है.
श्राप थोड़े ही लेना है शराब ना देकर! तो दोनो पंडित मूर्खनंद और सूरमाचंद टूट पड़े मुफ़्त की दारू पर. कुछ देर बाद जब सूरमचंद जी टल्ली
हो गए और 'स' को 'श' बोलने लग गए तो हमने पूछा कि अब मतलब बताओ.
तो पंडित सूरमचंद जी बोले, "शुनिए. त्रिशाला का मतलब. आपको पता है एक शॉल होती है...एक दुशाला होता है...
वो शॉल से मोटा होता है. 'दू' के बाद 'त्रि'....यानी दुशाला से मोटा त्रिशाला. अब शमझ में आया?"
"ओह, तो काफ़ी मतलब गर्म.....""जी हाँ जी हाँ आप ठीक शम्झे. शरदियाँ अच्छी गुजर गयीं..... तेड़ी धड़कनों को शू लूं.
....तेड़ा जीश्म ओढ़ लूं.....
दिल कह रहा है.....तुझशे ये रिश्ता जोड़ लूँ.....तेड़ी धड़कनों को शू लूं.....तेड़ा जीश्म ओढ़ लूं",
गाते-गाते पंडित जी उठ खड़े हुए.मैं समझ गया कि पंडित जी को दारू के साथ-साथ एक और चीज़ भी चढ़ गई है.
अब वो बीवी के पास पहुँच कर ही दम लेंगे."क्या हुआ पंडित जी? किधर को चल पड़े? इतने वक़्त बाद आते हैं और एक ही नाम
का मतलब बता कर रफूचक्कर?""नही-नही जजमान, पूछिए. बैठ जाओ सूरमाचंद." मूर्खनंद जी बोले.
"एक शौ का नोट होगा आपके पाश?" सूरमचंद मौके का फाएदा उठाते हुए बोले.."क्या बुरे दिन आ गए है. हज़ारों हज़म
करने के बाद अब सौ..."मैने सोचा. "चलो ठीक है. पैसे देता हूँ. बैठो. अब मुझे प्रीतीश नाम का मतलब बताओ. मेरे प्यारे से
भतीजे का नाम है."
"ठीक है, शोचने दो शोचने दो......" पंडित जी गंभीर हो कर बैठ गए.
"महाराज, वॉश रूम उधर है", मैं घबराते हुए बोला.
"अरे नही जजमान. वो सोचने की बात कर रहे हैं. Let him think." पंडित मूर्खनंद जी ने सफाई दी.
"एक पेग और बनाओ जजमान. दिमाग़ चलेगा नहीं, डोड़ेगा."
तीन-चार पैग और चढ़ाने के बाद और आधा घंटा माता पच्ची करने के बाद पंडित लोग किसी निर्णय पर पहुँच ही गये.
"शुणिए जजमान. 'प्रीतीश' नाम 'हिंगलिश' में है. यानी हिन्दी और इंग्लीश का मिक्श्चर.... यार थोड़ा नमकीन मिक्श्चर इधर पाश करना
.....और जजमान आप एक पैग और बनाइए...."
"अरे पंडित जी, लुढ़क जाओगे. बस करो."
"नही जजमान शिरफ एक
और. आखरी. बल्कि ये पीने के बाद आपको अपनी शाली 'मुश्कान' का मतलब भी बताऊँगा....आली रे..शालि रे..."
मुझे थोड़ा गुस्सा भी आ गया. मैं बोला, "यार पंडित जी, मुस्कान का मतलब तो मुझे भी पता है, सबको पता है 'smile'.
आप ज़्यादा से ज़्यादा क्या बता दोगे, 'smirk'?"
"अरे नही जजमान, आपने हमें शमझ क्या रखा है. ये मतलब तो वो है
जो कोई 'layman' बताएगा आपको. We are professionals! और हम कोई अंग्रेज नही हैं जो 'मुश्कान' का मतलब
'श्माइल' बता देंगे. हम वेद पुराणो के हीशाब शे चलते हैं. उशी हीशाब से शुद्ध हिन्दी में बताएँगे मतलब. Resht assured."
"ठीक है. फिलहाल 'प्रीतीश' का बताइए."
"शुनिये. प्रीतीश बना है, Pre+तीश. यानी तीश शाल शे कम. माँ-बाप खूब शोच-शमझ
कर रखते हैं ये नाम. ताकि वो कभी बूढ़ा ना दिखे. चाहे चालिश का हो जाए, चाहे शाथ या शत्तर या अश्शि.....लगेगा तीश शे कम!
आल्वेज इन ट्वेंटीज...."
"एक आइडिया है जजमान" पंडित सूरमाचंद बोल उठे. "कल को आपकी शादी हो, बेटी हो, तो उश्का नाम आप
'प्रीबीश' रख देना. यानि बीश शाल शे कम. Aalvej in teensh! लड़कियाँ इशी में खुश रहती है. वॉट एन आइडिया शर्जी. इशी बात पर निकालिए एक पाँच शौ
का करारा-करारा...."
(शहर बसा नही, उचक्के पहले आ गए.) "पंडित जी आप पहले 'मुस्कान' का मतलब तो बता दीजिए!"
मगर पंडित जी की तो आँखें ही बंद होने लग गयीं थी. मुँह में बुदबुदाते लुढ़क गए और सो गये, "आली रे...शाली रे...भेजे में कचूमर भरके दिल का
पिंजरा खाली रे...."चलो मैने सोचा, आज कम से कम एक के बजाए दो नामों का मतलब तो बता दिया. जब होश में
आएँगे तो पाँच सो की बात भी भूल जाएँगे और चले जाएँगे. बाकी अगले हफ्ते सही. अब पैसे ख़त्म हैं तो आएँगे तो ज़रूर....
Next...meaning of 'Muskan'
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